लतिका - एक कथा

लतिका – एक कथा

रास्ते किनारे भीख माँगती इस बूढ़ी औरत की आँखों में कितनी कृतज्ञता और सम्मान है। हँसते हुए यह बुढ़िया याचना करती है। कुछ दे देने पर -नौकरी करते रहो- का आशीर्वाद देती है। सचिवालय के इस रास्ते से गुजरने वाले लोग नौकरीपेशा है इसे मालूम है। वो मेरे ऑफिस के पास वाले चौराहे पर बैठती […]

अनवरत… अविराम

अनवरत… अविराम वे सारी मजदूरिनें फिर से काम पर जुट पड़ी थीं

अनवरत… अविराम वे सारी मजदूरिनें फिर से काम पर जुट पड़ी थीं। उनमें चार बच्चियाँ थीं – अपने उम्र से कई गुना बड़ी। इस मज़दूरी की बदौलत उनके स्कूल और कॉलेज के फीस और अन्य खर्चों का इंतजाम होता था। उम्र- यही कोई पंद्रह से बीस। एप्रोच – खालिश दुनियादारों का। लेकिन व्यवहार – बच्चों […]

वह आदमी बात थोड़ी पुरानी है

वह आदमी बात थोड़ी पुरानी

वह आदमी बात थोड़ी पुरानी है – फरवरी २०११ की। तब मैं वन उत्पादकता संस्थान में रिसर्च एसोसिएट था। हज़ारीबाग़ के सुदूर बड़कागाँव  प्रखंड के एक सुदूर गाँव से गुजर रहा था। इस गाँव के पास की पहाड़ी पर दूर से कुछ हरीतिमा नज़र आ रही थी। मतलब वहाँ जंगल था। उस जंगल से कुछ […]