अनवरत… अविराम वे सारी मजदूरिनें फिर से काम पर जुट पड़ी थीं। उनमें चार बच्चियाँ थीं – अपने उम्र से कई गुना बड़ी। इस मज़दूरी की बदौलत उनके स्कूल और कॉलेज के फीस और अन्य खर्चों का इंतजाम होता था। उम्र- यही कोई पंद्रह से बीस। एप्रोच – खालिश दुनियादारों का। लेकिन व्यवहार – बच्चों […]
